Abhilash Wagadre

उम्मीद के पर (पंख) कहा आग से जलते है ,
उम्मीद के पर कहा हवा से बिखरते है।
उम्मीद के पर कहा पानी से गलते है ।
नाउम्मीदी में भी उम्मीद छुपी है ।
निराशा के ढेर को तुम उकेरो उसमे भी आशा की किरण छुपी है।
तुम बस राहो पर चलते , समय का इम्तहान दो ।
मंजिल की चिंता छोड़ो वो खुद तुम्हारे इंतज़ार में खड़ी है।
 
    द्वारा -                                 अभिलाष वागद्रे